Follow by Email

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

'सूखी आँख से आँसू सोच'

(46)
कर्ब* का यह भी पहल सोच
सूखी आँख से आँसू सोच

ठोकर-ठोकर लम्स* उगा
सहरा-सहरा* ज़ानू* सोच

दर्द की बे-आवाज़ी सुन
कल के ज़ख़्म की ख़ुशबू सोच

अपने वज़्न को आप न जाँच
इक-इक हाथ तराज़ू सोच

चढ़ता चाँद, सरापा देख
बिखरे-टूटे बाज़ू सोच

रात औ दिन के बीच समय!
जलता-बुझता जुगनू सोच

1- कर्ब*--व्याकुलता
2- लम्स* --स्पर्श
3- सहरा-सहरा*--वन
4- ज़ानू*--गोद

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें