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गुरुवार, 8 सितंबर 2011

'पीछे पलटो पाओ गुमाँ'

(47)
पीछे पलटो पाओ गुमाँ*
उलटी सम्त बहाव गुमाँ

बाज़ू-बाज़ू दरिया तैर,
अगले घाट की नाव गुमाँ

बीते दिनों की यादों! जाओ
तुम भी अब बन जाओ गुमाँ

ग़ैर यक़ीनी हर इक शय
देखो सच बतलाओ गुमाँ

अंत ज़ियाँ* ऐ उम्र तेरा
ऊँचे-नीचे भाव गुमाँ

1- गुमाँ* --भ्रम
2- ज़ियाँ*--घाटा

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