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सोमवार, 19 मार्च 2012

'भरोसा उसे मेरी यारी का है'

(92)
भरोसा उसे मेरी यारी का है
हुनर मुझमें मतलब-बरारी का है

मेरे दिल को दुनिया से नफ़रत न थी
नतीजा तेरी ग़म-गुसारी का है

मैं अज़-ख़ुद* बिखरना न चाहूँ मगर
अजब वक़्त ख़ुद-इंतशारी* का है

बहाने का रंजिश के जोया है वह
यह मौक़ा अजब होशियारी का है

तख़ातुब* में इज़्ज़त भी, अलक़ाब भी
ये सब सिलसिला नागवारी* का है

गिराँ मुझपे है होशमंदी तेरी
तुझे दुख मेरी मयगुसारी का है

1- अज़-ख़ुद--अपने आप
2- ख़ुद-इंतशारी--स्वयं का बिखराव
3- तख़ातुब--संबोधन
4- अलक़ाब--सम्मानसूचक शब्द
5- नागवारी--अप्रसन्नता

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