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गुरुवार, 16 जून 2011

अंजान की तरह


उफ! क्या कहर था वो ताज़ा ताअरूफ का
लुत्फ भी...एक बार फिर मिलो मुझे अंजान की तरह.

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही खूब लेख है..सच लिखा है 'फिर मिलो अंजान की तरह'
    शुक्रिया

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